मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा 2026: फीस, प्रवेश, पात्रता, करियर, वेतन

वर्तमान समय में लाखों ऐसे छात्र हैं जिनका सपना इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाना है। खासतौर पर छात्र ऐसे इंजीनियरिंग कोर्स की तलाश में हैं जो कम समय में बेहतर तकनीकी ज्ञान और रोजगार के अवसर प्रदान कर सके। कम समय में मैकेनिक बनने के लिए मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा एक बेहतर विकल्प हो सकता है। जो छात्र मशीनरी उपकरण, यांत्रिक प्रणालियों के डिजाइन, इंजन, मोटर, प्रोडक्शन तकनीक और मैकेनिकल डिजाइनिंग जैसे महत्वपूर्ण विषयों का व्यावहारिक और सैद्धांतिक ज्ञान कम समय में प्राप्त करना चाहते हैं, उन छात्रों के लिए यह ब्लॉग लेख बेहतर साबित होने वाला है।

यदि आप भी वाहनों के उपकरणों, वाहनों के रखरखाव, टेक्नीशियन, मशीनों और अन्य मैकेनिकल संबंधी क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखते हैं, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें, क्योंकि आज इस लेख में हम मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स के बारे में विस्तार से बताने वाले हैं। आप आज इस लेख में जानेंगे कि डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग क्या होता है और इसे करने के लिए फीस, प्रवेश प्रक्रिया, आवेदन प्रक्रिया, जरूरी कौशल और पाठ्यक्रम क्या है।

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा

कार्यक्रमडिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग
अवधि3 वर्ष (6 सेमेस्टर)
योग्यता10वीं / 12वीं उत्तीर्ण
प्रवेश प्रक्रियाप्रवेश परीक्षा या मेरिट आधारित
करियर विकल्परेलवे, टेक्निशियन, जूनियर इंजीनियर, BHEL, DRDO, ISRO, ऑटोमोबाइल कंपनियाँ

Table of Contents

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा क्या है?

मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा एक तीन वर्ष का डिप्लोमा सर्टिफिकेट कोर्स है, जिसकी सीटें राज्य पॉलिटेक्निक और तकनीकी संस्थानों द्वारा आवंटित की जाती हैं। यह डिप्लोमा कोर्स उन छात्रों के लिए होता है, जो कम समय में मैकेनिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखते हैं। इस कोर्स को सफलतापूर्वक समाप्त करने के बाद आप जूनियर मैकेनिकल इंजीनियर के रूप में करियर की शुरुआत कर सकते हैं।

यह कोर्स पूरी तरह से तकनीकी और कौशल से भरा हुआ है, जिसका मुख्य विषयनिष्ठ छात्रों को मशीनों के उपकरणों, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के मूल सिद्धांतों, मशीन डिजाइन, थर्मोडायनामिक्स, मैटेरियल साइंस, ऑटोमोबाइल, डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग और वाहनों के इंजन की समझ व प्रणालियों की कार्यप्रणाली का प्रशंसात्मक सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक ज्ञान देना है।

डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग अवधि

मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा की अवधि मुख्य रूप से तीन वर्ष की होती है, हालाँकि आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) से किसी मान्यता प्राप्त ट्रेड में उत्तीर्ण करने के बाद यह कोर्स केवल दो वर्ष के लिए होता है, क्योंकि सीधा लेटरल एंट्री (दूसरे वर्ष) में दाखिला मिलता है। तीन वर्षीय कोर्स में कुल छः सेमेस्टर और वहीं दो वर्ष के लिए चार सेमेस्टर होते हैं।

डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग क्यों चुनें?

मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा चुनने का कोई एक कारण नहीं है, बल्कि कई व्यावहारिक, करियर-उन्मुख और भविष्य से जुड़े कारण हो सकते हैं। हर छात्र अपनी रुचि, क्षमता और करियर लक्ष्य के अनुसार इस कोर्स का चयन करता है। नीचे मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स के कुछ प्रमुख और विशिष्ट फायदे दर्शाए गए हैं।

  • कम समय में इंजीनियरिंग कोर्स: जहाँ बीई/बीटेक/बीएससी आईटी कोर्स की अवधि चार वर्ष की होती हैं, वहीं मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स केवल तीन वर्ष के लिए होता है। इस कोर्स को चुनने का एक बड़ा कारण इसकी समय अवधि है, जो छात्र कम समय में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह डिप्लोमा कोर्स एक उपयुक्त विकल्प है।
  • बेहतर करियर विकल्प: मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स करने के बाद सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में करियर के अवसर उपलब्ध हैं। आप रेलवे (लोको पायलट, जूनियर इंजीनियर), BHEL, ONGC, DRDO, ISRO, ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री (मारुति, टाटा, हुंडई), मैन्युफैक्चरिंग कंपनियाँ आदि विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकते हैं।
  • मैकेनिक की बढ़ती मांग: ऑटोमोबाइल अध्यवसाय मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस और कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों में एक अनुभवी मैकेनिक की मांग तेजी से बढ़ रही है। मैकेनिकल डिप्लोमा कोर्स बीटेक मैकेनिकल के मुकाबले अधिक व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने का प्रयास करता है, जिस कारण मैकेनिक के क्षेत्र में डिप्लोमा मैकेनिकल सर्टिफिकेट धारक छात्रों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
  • स्वरोजगार की संभावना: ऑटोमोबाइल क्षेत्र बड़ी तेजी के साथ प्रौढ़ता कर रहा है। ऐसे में मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स करने के बाद जरूरी नहीं की केवल नौकरी पाने की उम्मीद तक ही सीमित रहा जाए, बल्कि मैकेनिकल कौशलों को विकसित कर खुद का व्यवसाय भी शुरू किया जा सकता है। डिप्लोमा मैकेनिकल कोर्स एक छात्र को इतना ज्ञान प्रदान कर ही देता है कि नौकरी न मिलने पर खुद का वर्कशॉप, सर्विस सेंटर, मशीन रिपेयरिंग यूनिट या अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर ही सकते हैं।

डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग पात्रता

मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में प्रवेश लेने के लिए उम्मीदवारों को उन सभी मानदंडों को पूरा करना अनिवार्य होता है, जो संबंधित पॉलिटेक्निक और तकनीकी संस्थानों द्वारा निर्धारित की जाती हैं। इस डिप्लोमा में दाखिले के लिए शैक्षणिक योग्यता, विषय संयोजन और कुछ अन्य बुनियादी शर्तें लागू होती हैं। यहाँ नीचे सभी आवश्यक मानदंडों की जानकारी दी गई है।

शैक्षणिक योग्यता:

  • मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लेने के लिए उम्मीदवार किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड स 10वीं (मैट्रिक) उत्तीर्ण हो।
  • 10वीं में गणित और विज्ञान विषय होना अनिवार्य है।
  • कुछ संस्थानों में केवल 12वीं उत्तीर्ण (PCM – भौतिकी, रासायनिक, गणित) के बाद ही प्रवेश की अनुमति होती हैं।
  • जो उम्मीदवार आईटीआई (ITI) उत्तीर्ण करने के बाद आवेदन करते हैं, उन्हें दूसरे वर्ष में लेटरल एंट्री प्रवेश मिलता है।

न्यूनतम अंक:

  • उम्मीदवार के 10वीं / 12वीं में कम से कम 35% – 50% अंक होना अनिवार्य है।
  • अंकों के मानदंड में राज्यों और संस्थानों के अनुसार बदलाव हो सकता है।
  • आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC/PwD) के उम्मीदवारों को अंको में छूट प्रदान की जाती है।

आयु सीमा:

  • मैकेनिकल डिप्लोमा में प्रवेश के लिए अधिकतर संस्थानों में न्यूनतम आयु 14 वर्ष निर्धारित है।
  • आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC) के उम्मीदवारों को आयु सीमा में छूट मिल सकती है।

प्रवेश प्रक्रिया:

  • मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश पॉलिटेक्निक प्रवेश परीक्षा (Entrance Exam) के माध्यम से होता है।
  • प्रवेश परीक्षाएँ विभिन्न राज्यों द्वारा आयोजित की जाती हैं।
  • प्रवेश परीक्षा में बेहतर रैंक लाने वाले उम्मीदवार को शीर्ष पॉलिटेक्निक संस्थान में पहले प्रवेश मिलता है।
  • कुछ संस्थानों में 12वीं के अंको के आधार पर मेरिट-योग्यता के आधार पर प्रवेश मिलता है।
  • ऐसे उम्मीदवार जो आईटीआई के बाद प्रवेश लेते हैं, उन्हें मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में सीधा दूसरे वर्ष में प्रवेश मिल जाता है।

महत्वपूर्ण कौशल

मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में प्रवेश के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं है, बल्कि इस डिप्लोमा कोर्स से संबंधित फील्ड के बारे में कुछ महत्वपूर्ण कौशलों का विकास होना भी जरूरी है। नीचे दी गई कौशलों की सूची मैकेनिकल डिप्लोमा के लिए बेहद जरूरी है।

  • गणित की अच्छी समझ
  • तकनीकी सोच और तार्किक क्षमता
  • संचार कौशल
  • समय प्रबंधन कौशल
  • सेफ्टी अवेयरनेस
  • समूह में कार्य करने की क्षमता
  • समस्या समाधान कौशल
  • बेसिल स्तर का कंप्यूटर ज्ञान
  • मशीनों और औजारों में रुचि
  • भौतिकी (Physics) की मूल बातें समझना
  • CAD सॉफ्टवेयर सीखने की क्षमता

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा

डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम

मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा का पाठ्यक्रम सभी राज्यों के पॉलिटेक्निक और गैर-पॉलिटेक्निक संस्थानों में लगभग एक समान ही होता है, हालाँकि इस डिप्लोमा कोर्स के पाठ्यक्रम में राज्य, बोर्ड और संस्थान के अनुसार थोड़ा-बहुत बदलाव भी हो सकते हैं। पाठ्यक्रम दो वर्षीय मैकेनिकल डिप्लोमा और तीन वर्षीय मैकेनिकल डिप्लोमा के अनुसार विभाजित होता है, हालाँकि फर्क केवल इतना होता है कि दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स में प्रथम वर्ष के दो सेमेस्टरों का पाठ्यक्रम शामिल नहीं होता है। नीचे मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में पढ़ाए जाने वाले प्रमुख विषयों की सूची दी गई है।

  • इंजीनियरिंग गणित – भाग 1 और 2
  • इंजीनियरिंग रसायन विज्ञान और पर्यावरण अध्ययन-1
  • इंजीनियरिंग भौतिकी
  • बेसिक इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स
  • कंप्यूटर का परिचय
  • संप्रेषण कौशल
  • प्रयोगशालाएँ
  • मशीनरी फंडामेंटल्स
  • इंजीनियरिंग ग्राफिक्स
  • इंजीनियरिंग रसायन विज्ञान और पर्यावरण अध्ययन-2
  • कार्यशाला प्रौद्योगिकी
  • थर्मोडायनामिक्स
  • तापीय इंजीनियरिंग – भाग 1
  • विनिर्माण प्रक्रियाएँ – भाग 1
  • विद्युत मशीनें
  • सीएनसी मशीनों का परिचय
  • तापीय इंजीनियरिंग – भाग 2
  • विनिर्माण प्रक्रिया – भाग 2
  • औजार इंजीनियरिंग
  • मापन और मीट्रोलॉजी
  • तरल यांत्रिकी और हाइड्रोलिक मशीनें
  • रोबोटिक्स बेसिक्स
  • कंप्रिहेंसिव वाइवा

डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग संस्थान

भारत में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स करने के लिए सामान्यतः पॉलिटेक्निक संस्थानों में प्रवेश लेना होता है, क्योंकि पॉलिटेक्निक संस्थान तकनीकी डिप्लोमा कोर्स के लिए सबसे प्रमुख और लोकप्रिय विकल्प माने जाते हैं। हालाँकि, यह जरूरी नहीं है कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा केवल पॉलिटेक्निक संस्थान से ही किया जाए, बल्कि आप किसी भी प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान या इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला ले सकते हैं। यहाँ भारत के कुछ प्रमुख पॉलिटेक्निक और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों की सूची दी गई है।

  • गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक, लखनऊ
  • गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक, कानपुर
  • गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक, रांची
  • गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक, बाँदा
  • मीनाक्षी कृष्णन पॉलिटेक्निक कॉलेज, चेन्नई
  • गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक, गाजियाबाद
  • सेंट्रल पॉलिटेक्निक कॉलेज, तिरुवनंतपुरम
  • गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक, जबलपुर
  • श्री गोविंदराम सेकसरिया पॉलिटेक्निक, इंदौर
  • श्री रामस्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय (SRMU)
  • एडीआरएस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, अलीगढ़
  • एमिटी यूनिवर्सिटी, ग्रेटर नोएडा
  • मिलेनियम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (एमआईटीएस), भोपाल
  • गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक, पटना
  • गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक, मुंबई
  • बिरसा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सिंदरी
  • सेंट्रल पॉलिटेक्निक, जमशेदपुर
  • नेताजी सुभाष पॉलिटेक्निक, कोलकाता
  • राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कोट्टायम
  • गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक, कोटा
  • L.D. कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, अहमदाबाद
  • लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU), पंजाब
  • जेएसपी पॉलिटेक्निक, नोएडा
  • एकेएम पॉलिटेक्निक कॉलेज, कोल्लम
  • अत्यम इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पटना
  • सेंट्रल पॉलिटेक्निक कॉलेज, चेन्नई

डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाएँ

भारत में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा के लिए हर वर्ष विभिन्न राज्यों के पॉलिटेक्निक संस्थानों द्वारा प्रवेश परीक्षाएँ आयोजित की जाती हैं। इन परीक्षाओं को राज्य तकनीकी शिक्षा बोर्ड या परीक्षा प्राधिकरण द्वारा आयोजित किया जाता हैं और इनमे लाखों छात्र आवेदन करते हैं। नीचे मैकेनिकल इंजीनयरिंग डिप्लोमा के लिए आयोजित होने वाली कुछ प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं की सूची दी गई है।

  • JEECUP – Joint Entrance Examination Council, Uttar Pradesh
  • DCECE – Diploma Certificate Entrance Competitive Examination
  • PECE (JCECEB) – Polytechnic Entrance Competitive Examination, Jharkhand Combined Entrance
  • TS POLYCET – Telangana State Polytechnic Common Entrance Test
  • Punjab JET – Punjab Joint Entrance Test
  • APJEE – Arunachal Pradesh Joint Entrance Examination
  • Assam PAT – Assam Polytechnic Admission Test
  • HP PAT – Himachal Pradesh Polytechnic Admission Test
  • JEXPO – Joint Entrance Examination for Polytechnics West Bengal
  • AMU Polytechnic Test
  • SRMJEEE – SRM Joint Engineering Entrance Exam (Diploma)

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा

डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग आवेदन प्रक्रिया

मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स में आवेदन की प्रक्रिया राज्य सरकारों और विभिन्न पॉलिटेक्निक/तकनीकी संस्थानों पर निर्भर करती है। हालाँकि, आवेदन की रुपरेखा लगभग सभी जगह एक जैसी ही होती है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में आवेदन के प्रमुख छात्रों को यहाँ विस्तार से बताया गया है।

पात्रता की जाँच:

  • जिस राज्य या निजी तकनीकी पॉलिटेक्निक संस्थान में मैकेनिकल डिप्लोमा के लिए आवेदन करना चाहते हैं, उसकी आधिकारिक वेबसाइट में जाकर सभी आवश्यक पात्रताओं की अच्छे से जाँच करें।
  • सभी राज्य के पॉलिटेक्निक और अन्य तकनीकी संस्थानों में 10वीं उत्तीर्ण शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य होती है।

आवेदन पत्र भरें:

  • आप जिस राज्य में आवेदन करना चाहते हैं, उस राज्य की आधिकारिक पॉलिटेक्निक वेबसाइट पर जाएँ।
  • अब आवेदन पत्र (Application Form) खोलें और पंजीकरण (Registration) प्रक्रिया पूरी करें।
  • पंजीकरण करने के बाद पूर्ण पत्र खोलें और सभी आवश्यक जानकारी भरें।
  • आवेदन पत्र भरते समय व्यक्तिगत विवरण, माता-पिता का विवरण, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, शैक्षणिक विवरण, जन्मतिथि, संपर्क विवरण, राष्ट्रीयता और आधार नंबर जैसी सभी जानकारियाँ ध्यानपूर्वक और सही-सही भरें।
  • अब दस्तावेज अपलोड में पीडीएफ फॉर्मेंट में पासपोर्ट आकर फोटो और हस्ताक्षर स्कैन करके अपलोड करें।
  • इसके बाद आवेदन शुल्क जमा करें, जिसकी शुल्क राशि ₹200–₹500 तक होती है। शुल्क राज्य और श्रेणी के अनुसार अलग भी हो सकती है।
  • अब एक बार सभी विवरणों की जाँच कर लें और अंतिम रूप से आवेदन पत्र जमा (Submit) करें।
  • अंतिम चरण में आवेदन फॉर्म की प्रिंट कॉपी या PDF सुरक्षित रख लें।

प्रवेश पत्र:

  • परीक्षा तिथि से लगभग 4-5 दिन पहले प्रवेश पत्र जारी कर दिया जाता है।
  • प्रवेश पत्र जारी होते ही डाउनलोड करें और परीक्षा का समय, परीक्षा केंद्र और तिथि को समझें।

प्रवेश परीक्षा दें:

निर्धारित तिथि पर आवंटित परीक्षा केंद्र पर जाकर प्रवेश परीक्षा दें।

मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा प्रवेश परीक्षा में गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।

सभी प्रश्न बहुविकल्पीय MCQ (Multiple Choice Questions) प्रकार के होते हैं।

परिणाम की घोषणा:

  • प्रवेश परीक्षा आयोजित होने के लगभग 2 से 4 सप्ताह बाद परिणाम जारी किया जाता है।
  • परिणाम घोषित के बाद अपने नाम, रोल नंबर और प्राप्त रैंक की जाँच करें।
  • यदि प्रवेश परीक्षा में रैंक अच्छी है, तो आप काउंसलिंग प्रक्रिया के लिए पात्र होते हैं।

काउंसलिंग प्रक्रिया:

  • काउंसलिंग के दौरान छात्रों को कोर्स का प्रकार और संस्थान का चयन करना होता है।
  • कोर्स चयन में मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा चुनें।
  • काउंसलिंग होने के बाद सीट आवंटन किया जाता है।
  • अंत में प्राप्त संस्थान में जाकर दस्तावेज सत्यापन और कोर्स फीस जमा होती है, जिसके बाद प्रवेश पुष्टि (Confirm) हो जाता है।

आवश्यक दस्तावेज:

  • 10वीं की मार्कशीट
  • प्रवेश परीक्षा स्कोरकार्ड
  • जाति प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)
  • फीस रसीद
  • निवास प्रमाणपत्र
  • आय प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)
  • ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC)
  • मेडिकल सर्टिफिकेट (कुछ संस्थानों में)
  • आधार कार्ड
  • बैंक पासबुक (यदि लागू हो)

डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग फीस

मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा की फीस राज्य, संस्थान का प्रकार (सरकारी/निजी), संस्थान की रैंकिंग, उपलब्ध सुविधाएँ (लैब, वर्कशॉप, पुस्तकालय) और छात्रावास जैसे प्रकरणों पर आधारित होती है। एक सामान्य अंदाजा देने के लिए नीचे संस्थान के अनुसार मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स फीस की अनुमानित संरचना प्रस्तुत की गई है।

संस्थान का प्रकारअनुमानित वार्षिक फीसकुल फीस
सरकारी संस्थान₹5,000 – ₹18,000₹10,000 – ₹54,000
सरकारी + निजी (अनुदानित)₹12,000 – ₹25,000₹36,000 – ₹75,000
निजी संस्थान₹15,000 – ₹70,000₹45,000 – ₹2.5 लाख

डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग करियर विकल्प

मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा पूरा करने के बाद रेलवे, रक्षा, सार्वजनिक उपक्रम, ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग, प्रोडक्शन, कंस्ट्रक्शन और ऊर्जा क्षेत्र जैसे प्रतिष्ठित सेक्टरों में करियर अवसर प्राप्त हो सकते हैं। नीचे कुछ प्रमुख और प्रतिष्ठित सरकारी व निजी क्षेत्रों में मिलने वाले अवसरों की सूची दी गई है।

  • तकनीकी नौकरियाँ: जूनियर मैकेनिकल इंजीनियर, रखरखाव अभियान्ता, उत्पाद की गुणवत्ता जाँच, CAD डिजाइनर, औद्योगिक मशीन स्थापना, CNC ऑपरेटर, गुणवत्ता नियंत्रण सहायक, ऑटोमोबाइल उद्योग (Tata, Mahindra, Maruti, Hero) और मशीन टूल टेक्नीशियन आदि।
  • सरकारी नौकरी के अवसर: रेलवे (RRB जूनियर इंजीनियर), BHEL, NTPC, DRDO, ONGC, ISRO, GAIL, SAIL, PWD, SSC JE, लोको पायलट और रक्षा क्षेत्र में टेक्निकल ग्रुप आदि।
  • उच्च शिक्षा के विकल्प: B.Tech या BE (Lateral Entry), बीएससी कंप्यूटर विज्ञान, बीबीए, बीसीए और तकनीकी सर्टिफिकेशन कोर्स आदि।
  • स्वरोजगार विकल्प: खुद का मशीन वर्कशॉप, CAD फ्रीलांसर, ऑटोमोबाइल गैराज, ऑटोमोबाइल पार्ट्स की दुकान, कार या बाइक सर्विस सेंटर और औद्योगिक रखरखाव सेवाएँ आदि।

संबंधित लेख: ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा क्या होता है?

डिप्लोमा इन मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा सैलरी

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद व्यक्ति की सैलरी कौशल, अनुभव, सेक्टर (सरकारी या निजी) और कार्य पद पर निर्भर करती है। यहाँ नीचे एक तालिका में क्षेत्र अनुसार अनुमानित शुरुआती मासिक सैलरी की राशि दी गई है।

क्षेत्रशुरुआती सैलरी (₹/माह)
जूनियर इंजीनियर₹12,000 – ₹18,000
रेलवे₹25,000 – ₹40,000
ऑटोमोबाइल सेक्टर₹16,000 – ₹25,000
टेक्निकल असिस्टेंट₹15,000 – ₹45,000
मेंटेनेंस इंजीनियर₹14,000 – ₹30,000

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कुछ संबंधित प्रश्न: FAQs

मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में कौन-कौन से सब्जेक्ट होते हैं?

मैकेनिकल डिप्लोमा कोर्स में मुख्यतौर पर यांत्रिकी, ऊष्मागतिकी, मशीन डिजाइन, द्रव यांत्रिकी, विनिर्माण प्रक्रियाएँ और ऑटोमोबाइल संबंधित कौशल जैसे विषय शामिल होते हैं।

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कितने साल का होता है?

जो छात्र 10वीं के बाद मैकेनिकल डिप्लोमा में प्रवेश लेते हैं उनके लिए तीन वर्ष, और आईटीआई के बाद प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए दो वर्ष का होता है।

डिप्लोमा के बाद मैकेनिकल इंजीनियर की सैलरी कितनी होती है?

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स करने के बाद व्यक्ति की सैलरी उसके अनुभव, कार्य, पद और कौशलों पर निर्भर करती है। कुछ प्रतिष्ठित सरकारी नौकरी जैसे रेलवे (लोको पायलट, जूनियर इंजीनियर), रक्षा क्षेत्र में तकनीकी पद और एसएससी जैसे क्षेत्रों में अनुमानित वर्षिक सैलरी ₹4 लाख से लेकर ₹15 लाख तक हो सकती है।

मैकेनिकल इंजीनियर में डिप्लोमा करने के बाद क्या करें?

मैकेनिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा समाप्त करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए बीटेक/बीई, बीएससी आईटी, बीएससी कंप्यूटर विज्ञान या बीसीए जैसे कोर्स में दाखिला ले सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न तकनीकी पदों पर अप्रेंटिस नौकरी करके अनुभव की प्राप्ति कर सकते हैं।

निष्कर्ष:

मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा उन छात्रों के लिए एक बेहतरीन और व्यावहारिक कोर्स विकल्प है, जो कम समय में तकनीकी क्षेत्र में जल्दी करियर अवसर प्राप्त करना चाहते हैं। यह कोर्स न केवल छात्रों को डिप्लोमा कोर्स प्रमाणपत्र देता है, बल्कि मशीनों, उपकरणों और मैकेनिकल प्रणालियों की कार्यप्रणाली को गहराई से समझने का व्यावहारिक ज्ञान भी प्रदान करता है।

इस डिप्लोमा कोर्स के बाद सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में बेहतर करियर विकल्प उपलब्ध है। बाकी आशा करते हैं कि इस लेख में मैकेनिकल डिप्लोमा कोर्स से संबंधित दी गई जानकारी आपके लिए जरूर उपयोगी रही होगी। यदि आप कम समय में भविष्य के लिए सुरक्षित और स्थिर करियर बनाना चाहते हैं, तो मैकेनिकल इंजीनियरिग डिप्लोमा उचित और प्रभावी कोर्स विकल्प हो सकता है।

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