केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा पात्रता, फीस, विषय, करियर, प्रवेश 2026

पेट्रोकेमिकल उद्योग, दवा कंपनियां, उर्वरक उद्योग, तेल रिफाइनरियां, पेंट उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में केमिकल इंजीनियरिंग आज के दौर में तेजी से विकसित हो रहा तकनीकी करियर बन गया है। आज लगभग सभी प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों में केमिकल इंजीनियर अपनी-अपनी भूमिका निभा रहे हैं। केमिकल इंजीनियरिंग गणित, रसायन और इंजीनियरिंग के मूल सिद्धांतों का उपयोग करके ऊर्जा उत्पादन, रसायनों, पदार्थों और परिवहन की प्रक्रियाओं को विकसित करने वाला पेशेवर है।

केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स उन छात्रों के लिए उत्कृष्ट विकल्प है जो 2026 में तकनीकी शिक्षा के माध्यम से एक बेहतर करियर का निर्माण करना चाहते हैं। यदि आप 10वीं उत्तीर्ण करके बेहतर तकनीकी करियर के लिए केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा (Diploma in Chemical Engineering) कोर्स करना चाहते हैं तो यह लेख आपके लिए बेहतर उपयोगी होने वाला है। यह ब्लॉग लेख आपको इस डिप्लोमा कोर्स के विभिन्न अवधारणाओं से अवगत करवाने वाला है।

केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा

कोर्स का नामकेमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा (Diploma in Chemical Engineering)
पात्रता मानदंड10वीं उत्तीर्ण (विज्ञान और गणित के साथ)
अवधि3 वर्ष (6 सेमेस्टर)
पाठ्यक्रम स्तरपॉलिटेक्निक डिप्लोमा
प्रवेश प्रक्रियायोग्यता-आधारित / प्रवेश-आधारित
करियर अवसरप्रक्रिया संचालक, प्रयोगशाला सहायक, ONGC, IOCL

Table of Contents

केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स क्या है?

केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा (Diploma in Chemical Engineering) एक तीन वर्षीय तकनीकी डिप्लोमा प्रोग्राम है। इस डिप्लोमा प्रोग्राम में छात्रों को रासायनिक प्रतिक्रियाएँ, प्रक्रिया प्रौद्योगिकी, उपकरण डिजाइन, औद्योगिक रसायन, पदार्थ विज्ञान, संयंत्र संचालन और सुरक्षा प्रबंधन के बारे में व्यावहारिक और सैद्धांतिक ज्ञान का संतुलन प्रदान किया जाता है। इस डिप्लोमा कोर्स का उद्देश्य छात्रों को केमिकल्स उत्पादन, रॉ मैटेरियल, औद्योगिक उपकरण, रासायनिक संयंत्रों में सुरक्षा और लैब में टेस्टिंग व रिसर्च जैसे प्रमुख कौशलों का ज्ञान प्रदान करना है।

केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा क्यों करें?

2026 में केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स क्यों चुनना चाहिए इसके कई ठोस कारण हैं, क्योंकि यह कोर्स इंडस्ट्री-ओरिएंटेड होता है। नीचे कुछ प्रमुख कारणों पर प्रकाश डाला गया है।

  • कम समय में बेहतर करियर अवसर: केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा की अवधि केवल 3 वर्ष होती है वही कोई व्यक्ति ITI (Industrial Training Institute) कोर्स करने के बाद इस तकनीकी डिप्लोमा में प्रवेश लेता है तो उसके लिए केवल 2 वर्ष निर्धारित है। बी.टेक इंजीनियरिंग की तुलना में डिप्लोमा इंजीनियरिंग कोर्स कम समय में पूरा कर सकते हैं।
  • उद्योगों में विशाल मांग: आज के समय में खाद्य प्रसंस्करण, पर्यावरण प्रबंधन, पेट्रोलियम, फार्मा, उर्वरक, प्लास्टिक और अन्य प्रमुक क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे हैं जिस कारण रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं को लेकर इन क्षेत्रों में केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारी इंजीनियरों की मांग में बढ़ोतरी हो रही है।
  • व्यावहारिक और सैद्धांतिक ज्ञान: केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में केवल थ्योरी के माध्यम से ध्यान नहीं दिया जाता है, बल्कि व्यावहारिक और सैद्धांतिक ज्ञान (प्रयोगशाला, कार्यशाला, औद्योगिक दौरा) के माध्यम से छात्रों को केमिकल के बारे में अध्ययन कराया जाता है।
  • उच्च शिक्षा के अवसर: केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद आप उच्च शिक्षा के लिए बी.टेक केमिकल इंजीनियरिंग, बी.एससी विज्ञान जैसे कोर्स कर सकते हैं। डिप्लोमा के बाद बी.टेक में दाखिला लेने वाले छात्रों को सीधे दूसरे वर्ष में प्रवेश मिलता है।
  • कम फीस में तकनीकी शिक्षा: केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा की फीस बी.टेक केमिकल इंजीनियरिंग और बी.एससी की तुलना में बेहद कम होती है। जिस कारण यह तकनीकी डिप्लोमा कोर्स छात्रों के लिए एक किफायती विकल्प बन जाता है।
  • उद्यमिता के अवसर: केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद खुद का व्यवसाय शुरू करने के विभिन्न अवसर प्राप्त हो सकते है। आप साबुन, डिटर्जेंट, सौंदर्य प्रसाधन, पेंट और उर्वरक जैसे उत्पादन कम निवेश में शुरू कर सकते हैं।
  • सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों करियर अवसर: केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारक व्यक्ति विभिन्न सरकारी क्षेत्र Shell, BASF, IOCL, ONGC और GAIL आदि वही प्रमुख निजी क्षेत्र जैसे पेट्रोकेमिकल कंपनियाँ, फार्मा सेक्टर, रबर उद्योग और ग्रीन टेक्नोलॉजी में करियर के अवसर प्राप्त कर सकते हैं।

केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा पात्रता मानदंड

केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में प्रवेश लेने के लिए कुछ बुनियादी योग्यताओं को पूरा करना बेहद आवश्यक है। इस डिप्लोमा कोर्स में लागू होने वाली पात्रताएं लगभग सभी संस्थानों में एक समान होती है। 2026 में प्रवेश लेने के लिए नीचे सभी प्रमुख मानदंड दिए गए हैं।

शैक्षणिक योग्यता:

  • केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में प्रवेश लेने के लिए उम्मीदवार किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं उत्तीर्ण होना चाहिए।
  • उम्मीदवार के 10वीं में गणित (Math) और विज्ञान (Science) विषय होना आवश्यक है।
  • ऐसे उम्मीदवार जो आईटीआई (ITI) उत्तीर्ण हैं उन्हें डिप्लोमा के दूसरे वर्ष में दाखिला मिलता है।

न्यूनतम अंक:

  • केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स करने के लिए उम्मीदवार के 10वीं में कम से कम 40%-50% अंक होना आवश्यक है।
  • आरक्षित वर्ग (OBC/SC/ST/EWS/PwD) के छात्रों को अंकों में छूट प्रदान की जाती है।

आयु सीमा:

  • केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा करने के लिए कोई आयु निर्धारित नहीं है, हालाँकि न्यूनतम आयु कम से कम 14 वर्ष होना आवश्यक है।

प्रवेश प्रक्रिया:

केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में दाखिला मुख्य दो तरीकों से होता है प्रवेश परीक्षा आधारित और मेरिट सूची आधारित। यह प्रक्रिया संस्थान, राज्य और विश्वविद्यालय के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। नीचे दोनों तरीकों पर टिप्पणी दी गई है।

  • मेरिट आधारित प्रवेश: कई निजी संस्थान और विश्वविद्यालय केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स के लिए उम्मीदवारों का चयन 10वीं की योग्यता मेरिट के आधार पर करते हैं। उम्मीदवारों को पहले संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट में जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदन के कुछ ही दिन बाद मेरिट सूची जारी की जाती है, जिसके बाद चयनित छात्रों को काउंसलिंग और दस्तावेज सत्यापन के बाद सीट आवंटित कर दी जाती है।
  • प्रवेश परीक्षा आधारित दाखिला: कई राज्य सरकार और केंद्रीय संस्थान केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में प्रवेश के लिए पॉलिटेक्निक प्रवेश परीक्षा (Entrance Exam) आयोजित करते हैं। इन परीक्षाओं का उद्देश्य ऐसे छात्रों का आकलन करना होता है जो केमिकल इंजीनियरिंग के लिए पॉलिटेक्निक संस्थान में दाखिला ले सके। उम्मीदवार को पहले परीक्षा की आधिकारिक वेबसाइट जैसे JEECUP, DCECE और JEXPO में जाकर प्रवेश परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदन के प्रवेश परीक्षा देनी होती है जिसके बाद काउंसलिंग प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन होता है।

महत्वपूर्ण कौशल ज्ञान:

केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता की आवश्यक नहीं है, बल्कि कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी के साथ-साथ बुनियादी व्यावहारिक कौशलों का ज्ञान होना भी आवश्यक है।

  • विज्ञान और गणित की मजबूत समझ
  • बुनियादी रासायनिक कौशल
  • मशीन और टूल्स को संभालने की क्षमता
  • समस्या समाधान करने की कुशलताएं
  • प्रयोगशाला कौशल और व्यावहारिक ज्ञान
  • तकनीकी ज्ञान (रिएक्टर, पंप, बॉयलर, हीट एक्सचेंजर्स)
  • उपकरण संचालन और नियंत्रण
  • अवलोकन और विश्लेषणात्मक कौशल
  • बुनियादी कंप्यूटर ज्ञान
  • विश्लेषणात्मक कौशल
  • लगातार सीखने की इच्छा
  • संचार कौशल
  • समय प्रबंधन और अनुशासन
  • बुनियादी अंग्रेजी भाषा का ज्ञान
  • गुणवत्ता प्रबंधन
  • परियोजना प्रबंधन
  • आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन

केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा

केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा सिलेबस

केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा एक तीन वर्ष का तकनीकी कोर्स है जो 6 सेमेस्टर में विभाजित होता है। इस डिप्लोमा कोर्स का सिलेबस राज्य अनुसार बदल भी सकता है हालाँकि छात्रों को अध्ययन करवाए जाने वाले विषय लगभग एक समान ही होते हैं। इस कोर्स का सम्पूर्ण सिलेबस नीचे दिया गया है।

  • प्रथम सेमेस्टर (Semester 1): कंप्यूटर फंडामेंटल्स, इंजीनियरिंग ड्रॉइंग – I, इंजीनियरिंग गणित-I, संचार कौशल, रसायन विज्ञान – I, बेसिक केमिकल इंजीनियरिंग, व्यावहारिक गणित और भौतिकी – I आदि।
  • द्वितीय सेमेस्टर (Semester 2): गणित – II, भौतिकी – II, कार्बनिक और भौतिक रसायन विज्ञान, इंजीनियरिंग ड्राइंग – II, रसायन विज्ञान – II, इंजीनियरिंग गणित और कंप्यूटर सिस्टम की मूल बातें आदि।
  • तृतीय सेमेस्टर (Semester 3): अकार्बनिक रसायनों की तकनीक, प्रक्रिया गणना, रासायनिक प्रक्रिया उद्योग, रासायनिक प्रक्रिया प्रौद्योगिकी – I, विद्युत प्रौद्योगिकी, ऊष्मप्रवैगिकी, पर्यावरणीय इंजीनियरिंग और यांत्रिक संचालन प्रयोगशाला आदि।
  • चतुर्थ सेमेस्टर (Semester 4): रासायनिक प्रक्रिया प्रौद्योगिकी – I, इंस्ट्रूमेंटेशन और प्रक्रिया नियंत्रण, बुनियादी इलेक्ट्रॉनिक्स, प्लास्टिक की तकनीक, ऊष्मागतिकी, स्टोइकोमेट्री के सिद्धांत, कार्बनिक रसायनों और उत्पादों की प्रौद्योगिकी आदि।
  • पंचम सेमेस्टर (Semester 5): रासायनिक प्रतिक्रिया इंजीनियरिंग, प्रक्रिया उपकरण डिजाइन मूल बातें, औद्योगिक प्रबंधन, रासायनिक इंजीनियरिंग ऊष्मागतिकी, ऐच्छिक – I और रासायनिक इंजीनियरिंग ड्राइंग आदि।
  • षष्ठ सेमेस्टर (Semester 6): संयंत्र डिजाइन और अर्थशास्त्र, इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट और उन्नत विषय, ऐच्छिक – II, हरित रसायन विज्ञान और सतत प्रौद्योगिकी, नैतिक अभ्यास और व्यावसायिकता, परियोजना कार्य, व्यावसायिक प्रशिक्षण, ऊर्जा प्रणाली इंजीनियरिंग का परिचय और प्रयोगशाला कार्य आदि।

केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्रवेश परीक्षाएँ

केमिकल इंजीनिरिंग डिप्लोमा में प्रवेश के लिए कई राजकीय पॉलिटेक्निक संस्था और निजी संस्थानों द्वारा प्रतिवर्ष प्रवेश परीक्षाएँ (Entrance Exams) आयोजित की जाती हैं। नीचे कुछ प्रमुख परीक्षाओं के बारे में बताया गया है।

  • JEECUP (Uttar Pradesh Polytechnic Entrance Exam): उत्तर प्रदेश राज्य के सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों में केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में प्रवेश के लिए यह परीक्षा आयोजित की जाती है। प्रतिवर्ष इस परीक्षा के लिए लाखों उम्मीदवार आवेदन करते हैं। JEECUP परीक्षा भारत की सबसे बड़ी डिप्लोमा प्रवेश परीक्षा मानी जाती है, इसके माध्यम से उत्तर प्रदेश के सरकारी और कई निजी पॉलिटेक्निक संस्थानों में दाखिला मिलता है।
  • DCECE (Diploma Certificate Entrance Competitive Examination): यह परीक्षा बिहार राज्य के पॉलिटेक्निक संस्थानों में केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है।
  • Delhi CET (Delhi Polytechnic Entrance Test): दिल्ली के सरकारी और कुछ प्रतिष्ठित निजी पॉलिटेक्निक संस्थानों में केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में प्रवेश के लिए इस परीक्षा को आयोजित किया जाता है।
  • Karnataka DCET (Diploma Common Entrance Test): DCET प्रवेश परीक्षा कर्नाटक राज्य के राजकीय और कुछ निजी पॉलिटेक्निक संस्थानों में केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में प्रवेश हेतु इस परीक्षा को आयोजित किया जाता है।
  • अन्य राजकीय प्रवेश परीक्षाएँ: इन राज्यों की तरह बाकी राज्यों में भी विभिन्न पॉलिटेक्निक प्रवेश परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं जैसे AP POLYCET (आंध्र प्रदेश), CG PPT (छत्तीसगढ़), JPECE (झारखंड), TS POLYCET (तेलंगाना), UBTER JEEP (उत्तराखंड), PJET (पंजाब), DTET (ओडिशा) और अन्य प्रमुख परीक्षाएँ उपलब्ध हैं।
  • निजी संस्थान प्रवेश परीक्षाएँ: कई निजी संस्थान अपने मैनेजमेंट स्कूलों में केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स के लिए स्वयं प्रवेश परीक्षा आयोजित करते हैं जैसे Amity Entrance Test, LPU Entrance Exam, Parul Entrance Test, Galgotias Polytechnic Entrance और Jain Entrance Test (JET) आदि।

केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा शीर्ष संस्थान

2026 में केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लेने के लिए कई सरकारी और निजी पॉलिटेक्निक संस्थान उपलब्ध हैं। नीचे शीर्ष संस्थानों की सूची दी गई है।

राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान:

भारत के शीर्ष सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों की सूची-

  • राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान, लखनऊ
  • राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान, पुणे
  • राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, कोलकाता
  • राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान, दिल्ली
  • राजस्थान पॉलिटेक्निक कॉलेज, जयपुर
  • राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान, चंडीगढ़
  • राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान, हैदराबाद
  • राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान, भोपाल
  • राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान, अहमदाबाद
  • राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान, चेन्नई
  • राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान, गोरखपुर
  • राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान, कानपुर
  • राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान, गाजियाबाद
  • राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान, झांसी
  • राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान, पटना
  • राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान, रांची

निजी संस्थान:

  • अमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा
  • एमआईटी पुणे पॉलिटेक्निक, पुणे
  • आदित्य पॉलिटेक्निक, विशाखापत्तनम
  • लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, जालंधर
  • चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़
  • पारुल यूनिवर्सिटी, वडोदरा
  • शारदा पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट, लखनऊ
  • एसआरएम पॉलिटेक्निक, चेन्नई
  • श्री एल. आर. तिवारी पॉलिटेक्निक, मुंबई
  • गोयल इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, लखनऊ

केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा आवेदन प्रक्रिया

2026 में केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा प्रोग्राम करने के लिए आवेदन प्रक्रिया बहुत आसान और यौगिक है। नीचे कुछ चरणों में स्पष्ट किया है कि कैसे इस डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन करें।

  • पात्रता मानदंड की जांच: उस प्रवेश परीक्षा या संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट में जाएँ जिसमे आप प्रवेश लेना चाहते हो। वेबसाइट में जाकर आयु, शैक्षणिक योग्यता, परीक्षा पैटर्न, परीक्षा सिलेबस और अन्य प्रमुख अवधारणाओं की अच्छे से जांच कर लें।
  • पंजीकरण करें: आधिकारिक वेबसाइट जैसे (JEECUP, DCECE, Delhi CET) में जाकर प्रवेश पोर्टल खोलें। अब New Registration पर क्लिक करके पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करें, जिसमे व्यक्तिगत विवरण, माता-पिता का विवरण, जन्म तिथि, लिंग, सम्पर्क विवरण और पासवर्ड भरें। अब आपको एक पंजीकरण नंबर प्राप्त होगा।
  • आवेदन पत्र भरें: पंजीकरण नंबर और पासवर्ड के माध्यम से दोबारा लॉगिन करें और आवेदन पत्र भरें। आवेदन पत्र भरते समय शैक्षणिक योग्यता, राष्ट्रीयता, शारीरिक गतिविधि, पता, श्रेणी (GEN/OBC/SC/ST), संपर्क विवरण और पसंदीदा संस्थान (मेरिट वाले छात्र) बिल्कुल ध्यान भरें।
  • दस्तावेज अपलोड: आवेदन पत्र में विवरण की सम्पूर्ण जानकारी भरने के बाद सभी प्रमुख दस्तावेजों को स्कैन करके अपलोड करें।
  • आवेदन शुल्क भुगतान: सभी राज्यों और निजी संस्थानों में डिप्लोमा प्रवेश परीक्षा की फीस अलग-अलग निर्धारित होती है जो आमतौर पर ₹200-₹1,000 तक होती है। शुल्क भुगतान डेबिट/क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, UPI और डिजिटल वॉलेट के माध्यम से कर सकते हैं।
  • आवेदन सबमिशन और प्रिंटआउट: सभी प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद एक बार आवेदन पत्र की अच्छे से समीक्षा कर लें और Final Submit पर क्लिक करके पत्र जमा कर दें। अब Print Application Form पर क्लिक करके आवेदन पत्र सेव करके रख लें।
  • प्रवेश परीक्षा दें: आवेदन के कुछ दिनों बाद प्रवेश पत्र जारी होता है जिसे लेकर निर्धारित तिथि में समय पर परीक्षा केंद्र जाकर प्रवेश परीक्षा दें।
  • परीक्षा परिणाम और मेरिट जारी: मेरिट आधारित आवेदन वाले छात्रों के लिए मेरिट सूची जारी की जाती है और प्रवेश परीक्षा आधारित छात्रों के लिए परीक्षा परिणाम आता है।
  • काउंसलिंग प्रक्रिया: अब छात्रों को काउंसलिंग के लिए आवेदन करना होता है जिसमे संस्थान का चयन और केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स चुनना होता है।
  • दस्तावेज सत्यापन और फीस: दो-चार दिन बाद काउसंलिंग परिणाम आने के बाद दस्तावेज सत्यापन और केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स की फीस जमा होती है।

केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा

केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा फीस

केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स की फीस शहर, संस्थान की रैंकिंग, विभिन्न सुविधाएँ (प्रयोगशाला शुल्क, परीक्षा शुल्क, छात्रावास शुल्क, खेल शुल्क, मेस शुल्क, पुस्तकालय शुल्क), ट्यूशन फीस और विकास शुल्क पर निर्भर करती है। नीचे बनी तालिका में केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स की अनुमानित शुल्क राशि दी गई है।

संस्थान का प्रकारवार्षिक फीस (₹)कुल फीस 3 वर्ष
सरकारी पॉलिटेक्निक₹10,000 – ₹20,000₹30,000 – ₹60,000
निजी पॉलिटेक्निक₹18,000 – ₹65,000₹54,000 – ₹2,00,000
निजी संस्थान₹30,000 – ₹1,50,000₹90,000 – ₹3,20,000

केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करियर

केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स करने के बाद केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारक के लिए कई प्रमुख रोजगार करियर अवसर हैं। आप अपने विवेक अनुसार किसी भी क्षेत्र में करियर बना सकते हैं। यहाँ नीचे कुछ प्रमुख करियर के अवसर दिए गए हैं।

करियर अवसर:

  • रिफाइनरी ऑपरेटर
  • कच्चे तेल प्रसंस्करण तकनीशियन
  • पाइपलाइन इंजीनियर
  • गुणवत्ता आश्वासन सहायक
  • उत्पादन पर्यवेक्षक
  • अनुसंधान सहायक
  • उर्वरक संयंत्र संचालक
  • गुणवत्ता नियंत्रण विश्लेषक
  • खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकीविद्
  • अपशिष्ट जल उपचार संचालन

प्रमुख करियर क्षेत्र:

  • पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उद्योग
  • फार्मास्यूटिकल उद्योग
  • प्लास्टिक और पॉलिमर उद्योग
  • उर्वरक और कीटनाशक उद्योग
  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योग
  • इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन
  • प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
  • हिंदुस्तान पेट्रोलियम
  • ऑयल इंडिया लिमिटेड
  • डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान)
  • सीएसआईआर (वैज्ञानिक अनुसंधान)
  • इसरो (अंतरिक्ष अनुसंधान)
  • भारतीय रेलवे
  • कृषि विभाग
  • जल निगम
  • गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया

उच्च शिक्षा के अवसर:

केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद उच्च शिक्षा के कई अवसर हैं, नीचे कुछ प्रमुख कोर्स दिए गए हैं।

  • बी.टेक इन केमिकल इंजीनियरिंग (सीधा द्वितीय वर्ष में प्रवेश)
  • बी.टेक इन फूड टेक्नोलॉजी
  • बी.टेक इन एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग
  • बी.टेक इन पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग
  • बी.एससी इन पेट्रोकेमिकल साइंस
  • एडवांस डिप्लोमा इन वॉटर एंड वेस्ट मैनेजमेंट
  • एडवांस डिप्लोमा इन प्रोसेस इंजीनियरिंग

संबंधित लेख: सूचना प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा कोर्स 2026

केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा सैलरी

केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारक की सैलरी सेक्टर, कंपनी, शहर, कार्य, अनुभव, कौशल ज्ञान और पद अनुसार निर्धारित होती है। नीचे बनी तालिका में अनुमानित वार्षिक सैलरी बताई गई है।

पदअनुमानित शुरुआती सैलरी (वर्षिक)
लैब टेक्नीशियन₹2 – ₹4 लाख
प्लांट सुपरवाइजर₹3 – ₹5 लाख
प्रोसेस टेक्नीशियन₹2.5 – ₹4.5 लाख
केमिकल प्लांट ऑपरेटर₹2 – ₹6 लाख
इंडस्ट्रियल सेफ्टी ऑफिसर₹3.5 – ₹6.5 लाख

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कुछ संबंधित प्रश्न: FAQs

केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा क्या है?

केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा एक तीन वर्ष का तकनीकी कोर्स है। इस डिप्लोमा कोर्स में कुल 6 सेमेस्टर होते हैं जिस दौरान छात्रों को केमिकल क्षेत्र से संबंधित विभिन्न विषयों के बारे में पढ़ाया जाता है।

12वीं के बाद केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कैसे करें?

12वीं के बाद केमिकल इंजीनियर बनने के लिए केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा, बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (केमिकल) और बी.टेक केमिकल इंजीनियरिंग कोर्स कर सकते हैं।

केमिकल इंजीनियर बनने के लिए सबसे अच्छा कॉलेज कौन सा है?

केमिकल इंजीनियरिंग कोर्स करने के लिए सरकारी पॉलिटेक्निक लखनऊ/चेन्नई/मुंबई/दिल्ली, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे/कानपुर/दिल्ली और अन्य प्रमुख संस्थान है।

केमिकल इंजीनियर कैसे बने?

केमिकल इंजीनियर बनने के लिए 10वीं उत्तीर्ण करने के बाद डिप्लोमा इन केमिकल इंजीनियरिंग या फिर 12वीं विज्ञान+गणित विषय में उत्तीर्ण करने के बाद बी.टेक इन केमिकल इंजीनियरिंग में प्रवेश ले सकते हैं।

निष्कर्ष:

केमिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा एक बेहतर तकनीकी कोर्स है। ऐसे छात्र जो संयंत्र संचालन, गुणवत्ता नियंत्रण और औद्योगिक सुरक्षा संबंधित क्षेत्रों में करियर अवसर सुरक्षित करना चाहते हैं उनके लिए यह डिप्लोमा कोर्स सुनहरा अवसर है। इस डिप्लोमा को करने के बाद सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में प्रयोगशाला तकनीशियन, उत्पादन पर्यवेक्षक, रासायनिक संयंत्र संचालक और प्रक्रिया तकनीशियन जैसे पदों पर रोजगार के अवसर प्राप्त कर सकते हैं।

छात्रों इस लेख के माध्यम से हमने केमिकल इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स की पूरी जानकारी प्रदान करने की कोशिश की है और हमे उम्मीद है कि इस डिप्लोमा कोर्स से संबंधित सभी उलझन दूर हो गई होंगी। यदि इस डिप्लोमा से संबंधित कोई प्रश्न उत्पन्न हो रहा हो तो आप हमसे में हमसे पूछ सकते हैं, आपकी समस्या दूर करना हमारी पहली प्राथमिकता है। धन्यवाद!

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