आधुनिक दुनिया में, प्लास्टिक ने हमारे जीवन के लगभग हर पहलू को छू लिया है- चाहे ऑटोमोबाइल क्षेत्र हो, मेडिकल उपकरण, पैकेजिंग क्षेत्र, निर्माण कार्य या इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र, हर जगह प्लास्टिक उत्पादों की माँग तेजी से बढ़ रही है। इसी बढ़ती माँग के कारण वर्तमान समय में प्लास्टिक इंजीनियरिंग एक उभरता हुआ करियर-उन्मुख क्षेत्र बन चुका है। ऐसे छात्र जो कम समय में तकनीकी शिक्षा प्राप्त करके प्लास्टिक उद्योग क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा एक बेहतर विकल्प हो सकता है।
यदि आप 10वीं कक्षा उत्तीर्ण कर चुकें हैं और 2026 में प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स करने की योजना बना रहे हैं, लेकिन इस कोर्स से संबंधित सही जानकारी नहीं है, तो यह लेख आपके लिए बेहद उपयोगी होने वाला है। क्योंकि, इस लेख में आप प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा से जुड़े सभी अहम पहलुओं को विस्तार से जानेंगे। हम इस लेख में आपको बताएँगे की प्लास्टिक इंजिनयरिंग डिप्लोमा कोर्स क्या है और इसे करने के लिए पात्रता, फीस, प्रवेश प्रक्रिया, संस्थान और करियर के विकल्प क्या हैं।

| कोर्स का नाम | प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा |
| पात्रता | 10वीं उत्तीर्ण (विज्ञान विषय) |
| प्रवेश-प्रक्रिया | प्रवेश परीक्षा या मेरिट-सूची |
| अवधि | 3 वर्ष (6 सेमेस्टर) |
| प्रवेश परीक्षा मोड़ | कंप्यूटर आधारित (CBT) |
प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा क्या है?
प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा एक विशेष तकनीकी डिप्लोमा प्रोग्राम है, जो पॉलिमर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के मूल सिद्धांतों पर दक्षता प्रदान करता है। इस डिप्लोमा की अवधि आमतौर पर 3 वर्ष (6 सेमेस्टर) होती है, जिसमें प्रत्येक सेमेस्टर में सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक प्रशिक्षण का संतुलित मिश्रण होता है।
यह डिप्लोमा कोर्स खास उन छात्रों के लिए तैयार किया गया है, जो प्लास्टिक क्षेत्र में प्लास्टिक सामग्रियों के गुणों, प्रसंस्करण तकनीकों, उत्पाद डिजाइन, गुणवत्ता नियंत्रण और उद्योग अनुप्रयोगों में व्यापक ज्ञान और प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहते हैं। इस कोर्स के दौरान छात्रों को सिखाया जाता है कि कैसे विभिन्न प्रकार के प्लास्टिक (थर्मोप्लास्टिक, थर्मोसेटिंग, इलास्टोमर्स) को विभिन्न तकनीकों जैसे इंजेक्शन मोल्डिंग, ब्लो मोल्डिंग, एक्सट्रूजन, वैक्यूम फॉर्मिंग के माध्यम से प्रसंस्कृत किया जाता है।
प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा क्यों करें?
प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा (Diploma in Plastic Engineering) कोर्स करने के पीछे कई ठोस और व्यावहारिक कारण हो सकते हैं। छात्र अपनी रूचि, शैक्षणिक योग्यता, तकनीकी क्षमता और करियर लक्ष्य के अनुसार इस डिप्लोमा कोर्स को चुनते हैं। एक छात्र को प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा में दाखिला क्यों लेना चाहिए, इसका जवाब केवल एक कारण तक सीमित नहीं है। इसलिए, यहाँ नीचे प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स चुनने के कुछ प्रमुख कारणों का उल्लेख किया गया है।
- रोजगार के व्यापक अवसर: प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा धारकों के लिए प्लास्टिक उद्योग क्षेत्र में उत्पादन पर्यवेक्षक, गुणवत्ता नियंत्रण निरीक्षक, प्लास्टिक इंजीनियर, प्रोसेस इंजीनियर, मोल्ड डिजाइनर, तकनीकी बिक्री कार्यकारी और R&D टेक्निशियन के रूप में रोजगार के कई व्यापक विकल्प उपलब्ध हैं।
- उद्यमिता की संभावनाएँ: यह डिप्लोमा कोर्स छात्रों को केवल नौकरी करने के लिए प्रेरित नहीं करता, बल्कि स्व-रोजगार और उद्यमिता के लिए एक उत्कृष्ट आधार प्रदान करता है। ऐसे छात्र जो स्व-रोजगार की तरफ जाना चाहते हैं, उनके लिए प्लास्टिक उत्पाद निर्माण, मोल्ड निर्माण, रीसाइक्लिंग इकाई या तकनीकी परामर्श सेवाओं जैसे व्यवसाय शुरू करने के विकल्प मौजूद हैं।
- कम समय में बेहतर करियर: जहाँ बी.टेक/बी.ई. प्लास्टिक इंजीनियरिंग कोर्स करने में 4 साल का समय लगता हैं, वहीं डिप्लोमा केवल 3 वर्ष में ही समाप्त हो जाता है। ऐसे में कम समय में तकनीकी योग्यता प्राप्त कर जल्दी बेहतर करियर के अवसर मिलने की संभावनाएँ हो सकती हैं।
- सतत विकास में योगदान: प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा छात्रों को नैतिक संतुष्टि और सामाजिक योगदान के लिए प्रेरणा प्रदान करता है, आप आधुनिक प्लास्टिक इंजीनियर पर्यावरण अनुकूल, बायोडिग्रेडेबल और रिसाइकिल योग्य सामग्री विकसित करके सतत विकास में योगदान दे सकते हैं।
- सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में करियर: इस डिप्लोमा को सफलपूर्वक पूरा करने के बाद सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में करियर की असीम संभावनाएँ हैं। आप भारतीय रेलवे, रक्षा उत्पादन इकाइयों, घरेलू प्लास्टिक उत्पाद निर्माण, सरकारी रिसर्च लैब्स, सार्वजनिक क्षेत्र की विनिर्माण कंपनियों और पुनर्चक्रण संयंत्र जैसे क्षेत्रों में नौकरी कर सकते हैं।
- उच्च शिक्षा के विकल्प: प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद आप उच्च शिक्षा के लिए प्लास्टिक इंजीनियरिंग में बी.टेक (लेटरल एंट्री), पॉलिमर इंजीनियरिंग में कोई एक विशेषज्ञता और उन्नत प्रमाणन कोर्सों में दाखिला ले सकते हैं।
प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा पात्रता मानदंड
प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा (Diploma in Plastic Engineering) कोर्स में प्रवेश लेने के लिए आवश्यक पात्रता मानदंड राज्य और संस्थान के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकते हैं। यह डिप्लोमा कोर्स मुख्य रूप से केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET) द्वारा संचालित किया जाता है। हालाँकि, कई प्रतिष्ठित सरकारी और निजी तकनीकी संस्थान भी इस कोर्स में दाखिला प्रदान करते हैं, लेकिन वो कोर्स पूरी तरह प्लास्टिक इंजीनियरिंग नहीं होते हैं। यहाँ नीचे प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश के लिए सभी आवश्यक पात्रता मानदंड विस्तार से दिए गए हैं।
शैक्षणिक योग्यता:
- उम्मीदवार किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं कक्षा विज्ञान (गणित, भौतिकी, रसायन विज्ञान) विषय में उत्तीर्ण हो।
- कुछ निजी संस्थान 12वीं कक्षा विज्ञान (भौतिकी, रसायन विज्ञान और गणित) वर्ग में उत्तीर्ण छात्रों को भी प्रवेश प्रदान करते हैं।
- ऐसे उम्मीदवार जो आईटीआई (इंजीनियरिंग ट्रेड) में उत्तीर्ण हों, उन्हें सीधा दूसरे वर्ष (लेटरल एंट्री) में दाखिला मिल जाता है।
न्यूनतम अंक:
- उम्मीदवार के 10वीं कक्षा में न्यूनतम अंक कम से कम 50% होने चाहिए।
- आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC) के छात्रों को संस्थान अनुसार अंकों में छूट भी दी जाती है।
आयु सीमा:
- उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 14 वर्ष होनी चाहिए, हालाँकि अधिकतम आयु के लिए कोई सीमा निर्धारित नहीं है।
राष्ट्रीयता:
- भारत में प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा में दाखिला लेने के लिए उम्मीदवार भारतीय नागरिक होना चाहिए।
- कुछ प्रतिष्ठित संस्थानों में एनआरआई/पीआईओ/विदेशी छात्रों के लिए अलग कोटा और प्रवेश प्रक्रिया है।
आवश्यक कौशल:
प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा में प्रवेश लेने के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता और आवश्यक मानदंड ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इस तकनीकी क्षेत्र में सफलता पाने के लिए कुछ बुनियादी कौशलों का होना भी अत्यंत आवश्यक है। नीचे प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स के लिए कुछ प्रमुख कौशलों की सूची दी गई है।
- मशीनों के साथ काम करने की क्षमता
- गणित और विज्ञान की समझ
- समय प्रबंधन
- नई तकनीक सीखने की इच्छा
- संचार कौशल
- समूह में कार्य करने की क्षमता
- डिजाइनिंग और रचनात्मक सोच
- पॉलिमर विज्ञान की समझ
- समस्या समाधान करने की कुशलताएँ
- उत्पाद डिजाइन सिद्धांत
- प्रसंस्करण तकनीकों में विशेषज्ञता
- डेटा विश्लेषण
- परियोजना प्रबंधन
- बुनियादी कंप्यूटर की समझ
- सॉफ्टवेयरों का उपयोग करने की समझ
प्रवेश-प्रक्रिया:
प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स में दाखिला मुख्य दो तरीकों से होता है मेरिट-योग्यता और प्रवेश परीक्षा आधारित। इस डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश की प्रक्रिया संस्थान और राज्य के अनुसार भिन्न हो सकती है। कुछ संस्थान 10वीं के अंकों के आधार पर मेरिट सूची द्वारा प्रवेश देते हैं, जबकि कई राज्य पॉलिटेक्निक बोर्ड, सीआईपीईटी और तकनीकी संस्थान प्रवेश परीक्षा आयोजित करके केवल योग्य छात्रों को प्रवेश देते हैं।
- मेरिट-योग्यता आधारित: छात्रों को पहले संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट या स्वयं संस्थान में जाकर प्रवेश के लिए आवेदन करना होता है। आवेदन के कुछ दिनों बाद कई चरणों में मेरिट सूची जारी की जाती हैं। अब जिन-जिन छात्रों को सीट आवंटन कर दी जाती हैं, उन्हें संस्थान में जाकर दस्तावेज सत्यापन और कोर्स की फीस जमा करके प्रवेश सुनिश्चित करना होता है।
- प्रवेश परीक्षा आधारित दाखिला: CIPET संस्था, राज्य पॉलिटेक्निक और कई निजी तकनीकी संस्थान प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करते हैं। छात्रों को पहले CIPET, राज्य पॉलिटेक्निक या संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट में जाकर प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन करना होता है। कुछ दिनों बाद प्रवेश पत्र जारी किया जाता है, जिसे लेकर परीक्षा में उपस्थित होना अनिवार्य है। उसके परीक्षा परिणाम जारी और काउंसलिंग प्रक्रिया होती है, जिसमे चयनित छात्रों को संस्थान में जाकर दस्तावेज सत्यापन और कोर्स फीस जमा करनी होती है। सभी प्रक्रियाएँ पूरी होने के बाद छात्र नियमित कक्षाओं में भाग ले सकते हैं।

प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा पाठ्यक्रम
प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा (Diploma in Plastic Engineering) कोर्स का पाठ्यक्रम विभिन्न राज्यों के पॉलिटेक्निक, CIPET और निजी तकनीकी संस्थानों की तुलना में थोड़ा भिन्न हो सकता है, हालाँकि यह अंतर केवल सेमेस्टर संरचना और विषयों के क्रम में होता है। इस कोर्स का पाठ्यक्रम कुछ इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक कौशल दोनों का संतुलित मिश्रण प्रदान हो। इस तीन वर्षीय प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा का संपूर्ण सिलेबस नीचे सेमेस्टर के अनुसार प्रस्तुत किया गया है।
- सेमेस्टर I: संचार कौशल-l, कार्यशाला गणित, पर्यावरण विज्ञान, संगणक एवं सूचना प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी रसायन, संगणक अभियांत्रिकी प्रयोगशाला, अभियांत्रिकी रसायन प्रयोगशाला, संचार प्रयोगशाला और पुस्तकालय कार्य।
- सेमेस्टर II: संचार कौशल-ll, अभियांत्रिकी भौतिकी, विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिकी अभियांत्रिकी, अभियांत्रिकी गणित, जीवन कौशल विकास, कार्यशाला अभ्यास, विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिकी प्रयोगशाला और अभियांत्रिकी भौतिकी प्रयोगशाला।
- सेमेस्टर III: बहुलक विज्ञान एवं अभियांत्रिकी, प्लास्टिक प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी-l, प्लास्टिक सामग्री-l, अभियांत्रिकी आरेखन, हाइड्रोलिक्स एवं वायवीय प्रणाली, उपयोगिताएँ एवं सेवा उपकरण, पुस्तकालय कार्य, प्लास्टिक प्रसंस्करण प्रयोगशाला-l और अभियांत्रिकी आरेखन अभ्यास।
- सेमेस्टर IV: प्लास्टिक प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी-ll, प्लास्टिक परीक्षण-ll, प्लास्टिक पुनर्चक्रण एवं अपशिष्ट प्रबंधन, वैकल्पिक विषय (उद्यमिता विकास, द्वितीयक प्रसंस्करण तकनीक, प्लास्टिक प्रसंस्करण एवं परीक्षण उपकरणों का अनुरक्षण), मुक्त वैकल्पिक विषय (परियोजना प्रबंधन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं मशीन लर्निंग), औद्योगिक भ्रमण रिपोर्ट, प्लास्टिक प्रसंस्करण प्रयोगशाला- ll, प्लास्टिक परीक्षण प्रयोगशाला-ll और पुस्तकालय कार्य।
- सेमेस्टर V: रीसाइक्लिंग तकनीक, प्लास्टिक सामग्री, औद्योगिक स्वचालन, थर्मोफॉर्मिंग और वैक्यूम फॉर्मिंग, प्लास्टिक टेस्टिंग एंड एनालिसिस, एडवांस पॉलिमर टेक्नोलॉजी और प्रयोगशाला कार्य।
- सेमेस्टर VI: परियोजना कार्य एवं उद्योग में प्रशिक्षण, भारतीय संविधान और सीआईपीईटी/एनपीटीईएल का ऑनलाइन प्रमाणन पाठ्यक्रम।
प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा शीर्ष संस्थान
प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा (Diploma in Plastic Engineering) एक तेजी से उभरता हुआ तकनीकी क्षेत्र है, इसलिए भारत में कई ऐसे प्रतिष्ठित पॉलिटेक्निक और निजी तकनीकी संस्थान मौजूद हैं, जो इस डिप्लोमा कोर्स में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। यदि आप 2026 में प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने की योजना बना रहे हैं, तो सही संस्थान का चयन करना बेहद महत्वपूर्ण है। यहाँ भारत के कुछ शीर्ष सीआईपीईटी संस्थानों की सूची दी गई है, जो उच्च गुणवत्ता की शिक्षा के लिए जाने जाते हैं।
- केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET), हैदराबाद
- केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET), कोलकाता
- केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET), चेन्नई
- केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET), अहमदाबाद
- केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET), लखनऊ
- केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET), रायपुर
- केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET), भुवनेश्वर
- केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET), कोच्चि
- केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET), मुरथल
- केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET), जयपुर
- केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET), बेंगलुरु
- केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET), गुवाहाटी
- केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET), वाराणसी
- केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET), मदुरै
- केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET), देहरादून
नोट: सीआईपीईटी संस्थानों में मुख्य रूप से प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स होता है, जबकि पॉलिटेक्निक और निजी तकनीकी संस्थानों द्वारा प्लास्टिक मोल्ड टेक्नोलॉजी डिप्लोमा और पॉलिमर इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स प्रदान किए जाते हैं।
प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्रवेश परीक्षाएँ
भारत में प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा (Diploma in Plastic Engineering) कोर्स में प्रवेश लेने के लिए कई संस्थानों द्वारा प्रवेश परीक्षाएँ (Entrance Exams) आयोजित की जाती हैं। यह परीक्षाएँ मुख्य रूप से CIPET (Central Institute of Petrochemicals Engineering & Technology), राज्य पॉलिटेक्निक बोर्ड और कुछ निजी तकनीकी संस्थानों द्वारा संचालित की जाती हैं। इन परीक्षाओं का उद्देश्य ऐसे छात्रों का आकलन करना है, जो इस डिप्लोमा में दाखिला लेने योग्य हों और तकनीकी शिक्षा, गणित, विज्ञान और इंजीनियरिंग आधारित विषयों की समझ रखते हों। यहाँ, प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली कुछ प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं का उल्लेख किया गया है।
- सीआईपीईटी जेईई प्रवेश परीक्षा: यह प्रवेश परीक्षा भारत के केंद्रीय पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET) में प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा में प्रवेश लेने के लिए आयोजित की जाती है। इस परीक्षा को CIPET जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (JEE) कहा जाता है, जिसे सीआईपीईटी संस्थान स्वयं आयोजित करता है।
- राज्य स्तरीय परीक्षाएँ: कई राज्य पॉलिटेक्निक अपने सरकारी और निजी संस्थानों में डिप्लोमा इन प्लास्टिक्स मोल्ड टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा इन प्लास्टिक प्रोसेसिंग एंड रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा इन पॉलिमर टेक्नोलॉजी और डिप्लोमा इन प्लास्टिक एंड मोल्ड टेक्नोलॉजी जैसे कोर्सों के लिए प्रवेश परीक्षाएँ आयोजित करते हैं। मुख्य रूप से यह परीक्षाएँ JEECUP (उत्तर प्रदेश), Delhi CET (दिल्ली), MP PPT (मध्य प्रदेश), Haryana DET (हरियाणा), WB POLYCET (पश्चिम बंगाल), TS POLYCET (तेलंगाना) और AP POLYCET (आंध्र प्रदेश) द्वारा संचालित की जाती हैं।
प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा आवेदन प्रक्रिया
प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा (Diploma in Plastic Engineering) या इससे संबंधित अन्य प्लास्टिक डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया CIPET और विभिन्न राज्य पॉलिटेक्निक संस्थाओं में थोड़ी भिन्न हो सकती है। कुछ संस्थान छात्रों की योग्यता का आकलन प्रवेश परीक्षा के माध्यम से करते हैं, जबकि कई जगह मेरिट आधारित दाखिला भी दिया जाता है। हालाँकि, आवेदन के सभी प्रमुख चरण लगभग एक समान होते हैं। यहाँ नीचे प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा में आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया को क्रमबद्ध चरणों में प्रस्तुत किया गया है।
- संस्थान का चयन: सबसे पहले आप यह तय करें कि प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा या संबंधित प्लास्टिक डिप्लोमा कोर्स, आप सीआईपीईटी (CIPET) या पॉलिटेक्निक किस संस्थान से करना चाहते हैं।
- ऑनलाइन पंजीकरण करें: सीआईपीईटी (CIPET) या राज्य पॉलिटेक्निक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ और प्रवेश परीक्षा के लिए पंजीकरण करें। पंजीकरण होने के बाद एक पंजीकरण आईडी और पासवर्ड प्राप्त होगा, जिसे भविष्य के लिए सुरक्षित नोट कर लें।
- आवेदन पत्र भरें: पंजीकरण आईडी और पासवर्ड से माध्यम से लॉगिन करें और प्रवेश आवेदन पत्र खोलें। अब व्यक्तिगत विवरण, शैक्षणिक विविरण, माता-पिता की जनकारी, जन्म-तिथि, संपर्क विवरण, पता, संस्थान और शाखा वरीयताएँ भरें। इसके बाद दस्तावेज अपलोड खंड में सभी प्रमुख दस्तावेजों को स्कैन करके अपलोड करें। अब एक बार आवेदन पत्र की समीक्षा कर लें और अंतिम जमा (Submit) करें।
- आवेदन शुल्क भुगतान: आवेदन पत्र जमा करने के बाद आवेदन शुल्क जमा करें। शुल्क की राशि सीआईपीईटी (CIPET) और राज्य पॉलिटेक्निक की तुलना में अलग हो सकती है। आवेदन शुल्क भुगतान आप ऑनलाइन क्रेडिट/डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग या UPI के माध्यम से कर सकते हैं।
- प्रवेश परीक्षा (यदि लागू हो): यदि प्रवेश परीक्षा आधारित चयन लागू है, तो प्रवेश पत्र जारी होने के बाद उसे डाउनलोड करें और निर्धारित तिथि, समय पर परीक्षा केंद्र जाकर परीक्षा दें।
- सीट आवंटन और काउंसलिंग: मेरिट सूची या प्रवेश परीक्षा परिणाम आने के बाद प्रवेश परीक्षा आधारित उम्मीदवार अब काउंसलिंग के लिए आवेदन करें। जिसमे आप अपनी रैंक के आधार पर संस्थान और शाखा चुनें।
- दस्तावेज सत्यापन और फीस जमा: सीट आवंटन हो जाने के बाद उम्मीदवारों को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्राप्त संस्थान पर जाएँ। यहाँ दस्तावेज सत्यापन और कोर्स की फीस जमा करके प्रवेश की पुष्टि करें।
महत्वपूर्ण दस्तावेज:
- 10वीं कक्षा की मार्कशीट
- जन्म प्रमाणपत्र
- आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र
- निवास प्रमाणपत्र
- जाति प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)
- रैंक कार्ड (यदि लागू हो)
- स्थानांतरण प्रमाणपत्र
- चरित्र प्रमाणपत्र
- पासपोर्ट आकार फोटो

प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा फीस
प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा (Diploma in Plastic Engineering) कोर्स की फीस CIPET (Central Institute of Plastics Engineering & Technology) और विभिन्न राज्य पॉलिटेक्निक संस्थानों में अलग-अलग निर्धारित होती है। इस कोर्स की फीस कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करती है- जैसे संस्थान के प्रकार (सरकारी/निजी/CIPET), कोर्स प्रकार, कॉलेज की रैंकिंग, स्थान और विभिन्न सुविधाएँ (छात्रावास, मेस, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, सुरक्षा) आदि। यहाँ नीचे संस्थान के अनुसार प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स की अनुमानित फीस संरचना दी गई है।
| संस्थान का प्रकार | वार्षिक अनुमानित फीस (₹) | कुल फीस (3 वर्ष) |
| CIPET संस्थान | ₹35,000 – ₹50,000 | ₹1,05,000 – ₹1,50,000 |
| सरकारी पॉलिटेक्निक | ₹16,000 – ₹30,000 | ₹38,000 – ₹1,00,000 |
| निजी पॉलिटेक्निक | ₹40,000 – ₹1,00,000+ | ₹1,20,000 – ₹3,00,000+ |
प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करियर विकल्प
प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा (Diploma in Plastic Engineering) कोर्स सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद छात्रों के लिए प्लास्टिक उद्योग क्षेत्र में करियर के कई असीम अवसर उपलब्ध हैं। इस डिप्लोमा के बाद आप अपनी रुचि और करियर लक्ष्य के अनुसार नौकरी या उच्च शिक्षा में से किसी एक विकल्प को चुन सकते हैं। यहाँ नीचे प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा के बाद उपलब्ध कुछ प्रमुख करियर विकल्पों के बारे में बताया गया है।
- प्रमुख करियर विकल्प: उत्पादन पर्यवेक्षक, उत्पादन इंजीनियर, प्रोडक्शन इंजीनियर, सरकारी लैब टेक्नीशियन, मोल्ड डिजाइनर, गुणवत्ता नियंत्रक निरीक्षक, R&D टेक्निशियन, तकनीकी बिक्री कार्यकारी, विपणन कार्यकारी, गुणवत्ता आश्वासन अभियंता, पुनर्चक्रण संयंत्र पर्यवेक्षक, प्रोडक्शन सहायक, टूल इंजीनियर, सीएडी डिजाइन सहायक, पैकेजिंग सुपरवाइजर, आपूर्ति श्रृंखला सहायक, कार्यशाला पर्यवेक्षक और पर्यावरण तकनीशियन आदि।
- प्रमुख करियर क्षेत्र: प्लास्टिक विनिर्माण उद्योग, इंजेक्शन मोल्डिंग संयंत्र और कारखाने, प्लास्टिक उत्पाद निर्माण इकाइयाँ, मोल्ड डिजाइन और टूल रूम, प्लास्टिक पैकेजिंग कंपनियाँ, ऑटोमोबाइल प्लास्टिक पार्ट्स उद्योग, प्लास्टिक रीसाइक्लिंग उद्योग, रेलवे, पॉलिमर परीक्षण एवं अनुसंधान प्रयोगशाला, रक्षा क्षेत्र, मेडिकल प्लास्टिक उपकरण उद्योग और सरकारी क्षेत्र आदि।
- उच्च शिक्षा के अवसर: B.Tech/B.E. (पॉलिमर इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, केमिकल इंजीनियरिंग (लेटरल एंट्री) में सीधा दूसरे वर्ष में दाखिला), पॉलिमर इंजीनियरिंग में विशेषज्ञता, पोस्ट डिप्लोमा इन प्लास्टिक प्रोसेसिंग, पोस्ट डिप्लोमा इन मोल्ड डिजाइन, और एम.टेक (पॉलिमर/प्लास्टिक इंजीनियरिंग) आदि।
- उद्यमिता के अवसर: प्लास्टिक पैकेजिंग व्यवसाय, प्लास्टिक पार्ट्स सप्लाई, घरेलू उपयोग के प्लास्टिक उत्पाद बनाना, प्लास्टिक उत्पाद निर्माता, मोल्ड निर्माता, निजी प्लास्टिक रीसाइक्लिंग प्लांट, प्लास्टिक बोतल और कंटेनर निर्माण, प्लास्टिक उद्योग में स्टार्टअप और निजी प्लास्टिक परीक्षण एवं गुणवत्ता सेवा केंद्र आदि।
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प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा वेतन
प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा (Diploma in Plastic Engineering) कोर्स करने के बाद जब कोई उम्मीदवार नौकरी प्राप्त कर लेता है, तब उसकी सैलरी कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करती है- जैसे कार्य क्षेत्र (सरकारी या निजी), शैक्षणिक योग्यता, पद, अनुभव, कौशल ज्ञान, कंपनी का स्तर और स्थान आदि। यहाँ नीचे प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा के बाद पद अनुसार मिलने वाली अनुमानित वार्षिक सैलरी की संरचना दी गई है।
| पद | अनुमानित वार्षिक वेतन |
| प्लास्टिक प्रोसेसिंग टेक्नीशियन | 2.0 – 5.0 लाख |
| प्रोडक्शन सुपरवाइजर | 2.5 – 4.5 लाख |
| मोल्ड डिजाइनर | 2.0 – 4.0 लाख |
| पैकेजिंग टेक्नोलॉजिस्ट | 2.0 – 5.5 लाख |
| इंजेक्शन मोल्डिंग ऑपरेटर | 2.5 – 3.5 लाख |
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कुछ संबंधित प्रश्न: FAQs
डिप्लोमा इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी क्या है?
प्लास्टिक टेक्नोलॉजी डिप्लोमा एक तीन वर्षीय तकनीकी डिप्लोमा पाठ्यक्रम है, जो प्लास्टिक और पॉलिमर उद्योग पर केंद्रित है। यह डिप्लोमा, प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा कोर्स की तरह ही होता है।
प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के लिए योग्यता क्या है?
सीआईपीईटी या राज्य पॉलिटेक्निक संस्थानों से प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के लिए छात्र किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं उत्तीर्ण होना चाहिए।
प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा की अवधि कितनी है?
प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा पाठ्यक्रम क्रम की अवधि मुख्य रूप से 3 वर्ष (6 सेमेस्टर) की होती है। हालाँकि, आईटीआई (तकनीकी ट्रेड) में उत्तीर्ण छात्रों को इस डिप्लोमा में सीधा दूसरे वर्ष में दाखिला मिलता है।
निष्कर्ष:
प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा (Diploma in Plastic Engineering) एक आधुनिक, तकनीकी और उद्योग-आधारित कोर्स है, जो तेजी से विकसित होते प्लास्टिक और पॉलिमर उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इस कोर्स में न सिर्फ पारंपरिक प्लास्टिक प्रसंस्करण तकनीकों को शामिल किया गया है, बल्कि यह उन्नत सामग्रियों, डिजिटल निर्माण और स्थिरता समाधान जैसे नए और भविष्य उन्मुख क्षेत्रों पर भी ध्यान देता है। प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यावहारिक प्रकृति और उद्योग-अकादमिक इंटरफेस है, जिस कारण सीआईपीईटी (CIPET) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के माध्यम से छात्रों को अत्याधुनिक लैब सुविधाएँ, अनुभवी संकाय और उत्कृष्ट प्लेसमेंट की सहायता प्राप्त होती है।
इस ब्लॉग लेख में हमने प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कोर्स से संबंधित सभी विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया है और हम आशा करते हैं कि आपको इस डिप्लोमा से संबंधी सभी प्रश्नों के जवाब जरूर मिले होंगे। अंत में केवल इतना कहना चाहते हैं कि यदि आप 10वीं के बाद ऐसा डिप्लोमा कोर्स करना चाहते हैं जिसमें अच्छी सैलरी, करियर ग्रोथ और भविष्य में उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध हों, तो प्लास्टिक इंजीनियरिंग डिप्लोमा 2026 में आपके लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकता है।
